शुक्रवार, 2 सितंबर 2016

🚩🔱 ❄ «ॐ»«ॐ»«ॐ» ❄ 🔱🚩

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  🌹🌟 राधे नाम संग हरि बोल 🌟🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

 🌹🔱🔅श्रीमद्भगवद्गीता🔅🔱🌹

🌹 श्रीमद्भगवद्गीता :
🌹 साधक-संजीवनी :
🌹 प्रथम अध्याय :

( गत ब्लाग से आगे )

संबंध- पितामह भीष्म के द्वारा शंख बजाने का परिणाम क्या हुआ, इसको संजय आगे श्लोक में कहते हैं।

ततः शंखाश्च भेर्यश्च पणवानकगोमुखाः ।
सहसैवाभ्यहन्यन्त स शब्दस्तुमुलोऽभवत् ।। 13 ।।

अर्थ- उसके बाद शंख, भेरी, ढोल, मृदंग और नरसिंघे बाजे एक साथ बज उठे। उनका वह शब्द बड़ा भयंकर हुआ।


व्याख्या- ‘ततः शंखाश्च भेर्यश्च पणवानक गोमुखाः’- यद्यपि भीष्म जी ने युद्धारम्भ की घोषणा करने के लिए ही शंख बजाया था, तथापि कौरव सेना ने भीष्म जी के शंखवादन को युद्ध की घोषणा ही समझा। अतः भीष्म जी के शंख बजाने पर कौरव सेना के शंख आदि सब बाजे एक साथ बज उठे।

‘शंख’- समुद्र से उत्पन्न होते हैं। ये ठाकुर जी की सेवा-पूजा में रखे जाते हैं और आरती उतारने आदि के काम में आते हैं। मांगलिक कार्यों में तथा युद्ध के आरंभ में ये मुख से फूँद देकर बजाये जाते हैं। ‘भेरी’ नाम नगाड़ों का है ये नगाड़े लोहे के बने हुए और भैंस के चमड़े से मढ़े हुए होते हैं तथा लकड़ी के डंडे से बजाये जाते हैं। ये मंदिरों में एवं राजाओं के किलों में रखे जाते हैं। उत्सव और मांगलिक कार्यों में ये विशेषता से बजाये जाते है। राजाओं के यहाँ से रोज बजाए जाते हैं। ‘पणव’ नाम ढोल का है। ये लोहे के अथवा लकड़ी के बने हुए और बकरे के चमड़े से मढ़े हुए होते हैं तथा हाथ से या लकड़ी के डंडे से बजाये जाते हैं। ये आकार में ढोलकी की तरह होने पर भी ढोलकी से बड़े होते हैं। कार्य के आरंभ में पणवों को बजाना गणेश जी के पूजन के समान मांगलिक माना जाता है। ‘आनक’ नाम मृदंग का है। इनको पखावज भी कहते हैं। आकार में ये लकड़ी की बनायी हुई ढोलकी के समान होते हैं। ये मिट्टी के बने हुए और चमड़े से मढ़े हुए होते हैं तथा हाथ से बजाये जाते हैं। ‘गोमुख’ नाम नरसिंघे का है। ये आकार में साँप की तरह टेढ़े होते हैं और इनका मुख गाय की तरह होता है। ये मुख की फूँक से बजाये जाते हैं।

सहसैवाभ्यहन्यन्त- कौरव सेना में उत्साह बहुत था। इसलिए पितामह भीष्म का शंख बजते ही कौरव सेना के सब बाजे अनायास ही एक साथ बज उठे। उनके बजने में देरी नहीं हुई तथा उनको बजाने में परिश्रम भी नहीं हुआ। ‘स शब्दस्तुमुलोऽभवत्’- अलग-अलग विभागों में, टुकड़ियों में खड़ी हुई कौरव सेना के शंख आदि बाजों का शब्द बड़ा भयंकर हुआ अर्थात उनकी आवाज बड़ी जोर से गूँजती रही।

( शेष आगे के ब्लाग में )

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