🚩🔱 ❄ «ॐ»«ॐ»«ॐ» ❄ 🔱🚩
※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※
🌹🌟 राधे नाम संग हरि बोल 🌟🌹
※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
🌹🔱🔅श्रीमद्भगवद्गीता🔅🔱🌹
🌹 श्रीमद्भगवद्गीता :
🌹 साधक-संजीवनी :
( गत ब्लाग से आगे )
❄ प्रथम अध्याय :
संबंध- अब दुर्योधन पितामह भीष्म को प्रसन्न करने के लिए अपनी सेना के सभी महारथियों से कहता है।
अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिताः ।
भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि ।। 11 ।।
अर्थ- आप सब-के-सब लोग सभी मोर्चों पर अपनी-अपनी जगह दृढ़ता से स्थित रहते हुए ही पितामह भीष्म की चारों ओर से रक्षा करें।
व्याख्या- ‘अयनेषु च सर्वेषु..... भवन्तः सर्व एव हि’- जिन-जिन मोर्चों पर आपकी नियुक्ति कर दी गई है, आप सभी योद्धा लोग उन्हीं मोर्चों पर दृढ़ता से स्थित रहते हुए सब तरफ से, सब प्रकार से भीष्म जी की रक्षा करें। भीष्म जी की सब ओर से रक्षा करें- यह कहकर दुर्योधन भीष्म जी को भीतर से अपने पक्ष में लाना चाहता है। ऐसा कहने का दूसरा भाव यह है कि जब भीष्म जी युद्ध करें, तब किसी भी व्यूह द्वार से शिखण्डी उनके सामने न आ जाए- इसका आप लोग खयाल रखें। अगर शिखण्डी उनके सामने आ जायगा, तो भीष्मजी उस पर शास्त्रास्त्र नहीं चलायेंगे। कारण कि शिखण्डी पहले जन्म में भी स्त्री था और इस जन्म में भी पहले स्त्री था, पीछे पुरुष बना है। इसलिए भीष्म जी इसको स्त्री ही समझते हैं और उन्होंने शिखण्डी से युद्ध न करे की प्रतिज्ञा कर रखी है। यह शिखण्डी शंकर के वरदान से भीष्म जी को मारने के लिए ही पैदा हुआ है। अतः जब शिखण्डी से भीष्म जी की रक्षा हो जायगी, तो फिर वे सबको मार देंगे, जिससे निश्चित ही हमारी विजय होगी। इस बात को लेकर दुर्योधन सभी महारथियों से भीष्म जी की रक्षा करने के लिए कह रहा है।
संबंध- द्रोणाचार्य के द्वारा कुछ भी न बोलने के कारण दुर्योधन का मानसिक उत्साह भंग हुआ देखकर उसके प्रति भीष्मजी के किये हुए स्नेह सौहार्द की बात संजय आगे श्लोक में प्रकट करते हैं।
( शेष आगे के ब्लाग में )
※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
🌹۞☀∥ राधेकृष्ण: शरणम् ∥☀۞🌹
※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
🌹: कृष्णा : श्री राधा प्रेमी : 🌹
https://plus.google.com/113265611816933398824
❄ धार्मिक पोस्ट पाने या हमारे सत्संग में सामिल होने के लिए हमें " राधे राधे " शेयर करें 💐
: मोबाइल नम्बर .9009290042 :
※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※
※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※
🌹🌟 राधे नाम संग हरि बोल 🌟🌹
※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
🌹🔱🔅श्रीमद्भगवद्गीता🔅🔱🌹
🌹 श्रीमद्भगवद्गीता :
🌹 साधक-संजीवनी :
( गत ब्लाग से आगे )
❄ प्रथम अध्याय :
संबंध- अब दुर्योधन पितामह भीष्म को प्रसन्न करने के लिए अपनी सेना के सभी महारथियों से कहता है।
अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिताः ।
भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि ।। 11 ।।
अर्थ- आप सब-के-सब लोग सभी मोर्चों पर अपनी-अपनी जगह दृढ़ता से स्थित रहते हुए ही पितामह भीष्म की चारों ओर से रक्षा करें।
व्याख्या- ‘अयनेषु च सर्वेषु..... भवन्तः सर्व एव हि’- जिन-जिन मोर्चों पर आपकी नियुक्ति कर दी गई है, आप सभी योद्धा लोग उन्हीं मोर्चों पर दृढ़ता से स्थित रहते हुए सब तरफ से, सब प्रकार से भीष्म जी की रक्षा करें। भीष्म जी की सब ओर से रक्षा करें- यह कहकर दुर्योधन भीष्म जी को भीतर से अपने पक्ष में लाना चाहता है। ऐसा कहने का दूसरा भाव यह है कि जब भीष्म जी युद्ध करें, तब किसी भी व्यूह द्वार से शिखण्डी उनके सामने न आ जाए- इसका आप लोग खयाल रखें। अगर शिखण्डी उनके सामने आ जायगा, तो भीष्मजी उस पर शास्त्रास्त्र नहीं चलायेंगे। कारण कि शिखण्डी पहले जन्म में भी स्त्री था और इस जन्म में भी पहले स्त्री था, पीछे पुरुष बना है। इसलिए भीष्म जी इसको स्त्री ही समझते हैं और उन्होंने शिखण्डी से युद्ध न करे की प्रतिज्ञा कर रखी है। यह शिखण्डी शंकर के वरदान से भीष्म जी को मारने के लिए ही पैदा हुआ है। अतः जब शिखण्डी से भीष्म जी की रक्षा हो जायगी, तो फिर वे सबको मार देंगे, जिससे निश्चित ही हमारी विजय होगी। इस बात को लेकर दुर्योधन सभी महारथियों से भीष्म जी की रक्षा करने के लिए कह रहा है।
संबंध- द्रोणाचार्य के द्वारा कुछ भी न बोलने के कारण दुर्योधन का मानसिक उत्साह भंग हुआ देखकर उसके प्रति भीष्मजी के किये हुए स्नेह सौहार्द की बात संजय आगे श्लोक में प्रकट करते हैं।
( शेष आगे के ब्लाग में )
※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
🌹۞☀∥ राधेकृष्ण: शरणम् ∥☀۞🌹
※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
🌹: कृष्णा : श्री राधा प्रेमी : 🌹
https://plus.google.com/113265611816933398824
❄ धार्मिक पोस्ट पाने या हमारे सत्संग में सामिल होने के लिए हमें " राधे राधे " शेयर करें 💐
: मोबाइल नम्बर .9009290042 :
※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※















